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जन्माष्टमी पर आज श्रीकृष्ण जन्म जैसा संयोग
इंदौर. जन्माष्टमी पर आज श्रीकृष्ण जन्म जैसा संयोग है. जयंती योग में स्मार्त व वैष्णव मत से एक ही दिन जन्माष्टमी मनेगी. इस दुर्लभ योग में किया उपवास करोड़ों यज्ञों का फल प्रदान करता है.

उक्त बात भारद्वाज ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान के शोध निदेशक आचार्य पण्डित रामचंद्र शर्मा वैदिक ने कही. आचार्य शर्मा ने बताया कि वर्षों बाद इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण का 5248वां प्राकट्य उत्सव तिथी, नक्षत्र के विशेष संयोग से जयंती योग में मनाया जाएगा दो प्रमुख स्मार्त व वैष्णव मत से एक ही दिन मनेगी, जयंती योग द्वापर युग जैसा संयोग बना रहा है. उन्होंने बताया कि पुराणादि धर्मशास्त्रों की मान्यता अनुसार श्रीकृष्ण भगवान का प्राकट्य भाद्र मास, कृष्ण पक्ष, अष्टमी तिथि बुधवार, रोहिणी नक्षत्र व वृषभ राशि के चन्द्रमा में अर्धरात्रि में हुआ था.
इस वर्ष 30 अगस्त सोमवार को वर्षो बाद श्रीकृष्ण जन्म समय के सभी दुर्लभ योगों का संयोग प्राप्त हो रहे हैं. 30 अगस्त सोमवार को सूर्योदय कालीन अष्टमी तिथि है जो रात्रि 1 बजकर 59 मिनिट तक रहेगी। अर्द्धरात्रि व्यापिनी रोहिणी नक्षत्र भी दूसरे दिन प्रातः 9 बजकर 43 मिनिट तक रहेगा. सूर्योदय कालीन अष्टमी तिथि अर्धरात्रि व्यापिनी रहेगी. रोहिणी नक्षत्र भी अर्धरात्रि में रहेगा. वृषभ राशि का चन्द्रमा भी है. इन दुर्लभ छः तत्वों के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग एवं लक्ष्मी नारायण योग जन्माष्टमी पर्व की शोभा बढाएंगे.
देशवासियों के लिए शुभ संकेत
धर्मशास्त्रकारों ने इस प्रकार के दुर्लभ योग संयोग की मुक्तकंठ से प्रसंशा कर इसे देश वासियों के लिए शुभ संकेत बताया है. छः मुख्य तत्वों के साथ सोमवार जन्माष्टमी पर्व को विशेष पुण्यफलदायी बना रहा है. जन्म जन्मान्तरों के पुण्य संचय से ही इस प्रकार के दुर्लभ योग की प्राप्ति कलियुग में होती है. विष्णु रहस्य,गौतमी तन्त्र,प द्मपुराणआदि ग्रन्थों में इस महायोग में व्रत,उपवास करने से पितृ यदि प्रेतयोनि को प्राप्त हुए हो तो वे प्रेतयोनि से मुक्त हो जाते है.
उपवास से करोड़ों यज्ञों का फल
जयंती योग में किया उपवास करोड़ों यज्ञों का फल प्रदान करता है. इस प्रकार धर्मशास्त्रीय गर्न्थो में इस दुर्लभ योग की बड़ी ही महिमा बताई गई है. आचार्य शर्मा वैदिक ने बताया कि ऐसे जयंतीयोग में जोभक्त उपवास कर रात्रि जागरण के साथ भगवन्नाम स्मरण व संकीर्तन करता है. उसके करोड़ों जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैव उसे श्रीकृष्ण भगवान की कृपा प्राप्ति होती है.
सन्तान प्राप्ति के लिए करें ये उपाय
जयंती योग में सन्तान गोपाल स्तोत्र व हरिवंश पुराण के पाठ का विशेष महत्व बताया गया है।विधि विधान पूर्वक इसके अनुष्ठान व भगवत्कृपा से सन्तान की प्राप्ति होती है ।जन्माष्टमी पर व्रत उपवास व पूजा का महत्व है,, इस वर्ष कृष्ण भक्तों के लिए कृष्ण जन्म का जयंती योग से विशेष महत्व बढ़ गया है।वर्षभर इंतजार के बाद यदि दुर्लभ जयन्ती योग प्राप्त हो जाये तो क्या बात हैं। आज के दिन व्रती को प्रातः नित्य कर्म से निवृत हो जन्माष्टमी व्रत विधिविधान से अनुष्ठान का संकल्प करना चाहिए। दिन में उपवास औऱ रात्रि जागरण व विविध पूजा उपचारों से बाल रूप श्रीकृष्ण का पूजन ,भगवत कीर्तन आदि इस उत्सव के प्रधान अंग है।*ॐ नमो भगवते वासुदेवाय व ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रनतह क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः – -इस महामन्त्र का जप करने चारो पुरुषार्थो की प्राप्ति होती है
अर्धरात्रि में कृष्ण जन्मोत्सव का विधान
सविधि बाल कृष्ण की पूजा अर्चना, श्रृंगार, प्रसाद( माखन मिश्री व पंजेरी ,कदली फल), आरती, पुष्पांजलि के साथ पूजा समर्पित की जाती हैं। पूजा के साथ आज के दिन शंख से चन्द्रमा व श्रीकृष्ण के लिए अर्घ्य दान का विशेष महत्ब बताया है। देश भर में मनाया जाता है कृष्ण जन्मउत्सव,,, श्रीनाथजी ,मथुरा वृन्दावन में कृष्ण जन्मोत्सव वैदिक विधि से मनाया जाता है जो दर्शनीय भी है ,वैसे पूरे भारत वर्ष मे जन्माष्टमी पर्व पूरे उत्साह व उल्लास के साथ मनाया जाता है।यह सर्वमान्य उत्सव है।वल्लभ,चैतन्य व निम्बार्क सम्प्रदाय का यह सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है।


